क्या आपके पैरो में अचानक कमजोरी या सुन्नता महसूस हो रही है? यह गुल्लिअन बार्रे सिंड्रोम( GBS) हो सकता है! गुल्लिअन बार्रे सिंड्रोम (GBS) एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल विकार है जो आमतौर पर किसी संक्रमण के बाद होता है | यह पोस्ट इन्फेक्शन विकार का क्लासिक उदहारण है, क्योकि इसमें लक्षण संक्रमण के 4 सप्ताह के अंदर तेजी से शुरू हो जाते है| रोग का कोर्स तेजी से प्रगतिशील और मोनोमोर्फिक (ek ही चरण वाला ) होता है, जो एक ही महीने में चरम पर पहुंच जाता है और फिर सुधर आना शुरू होता है | ज्यादातर मामलो में वायरल भुखार या पेट के संक्रमण के 1-3 हफ्ते बाद शुरू होती है | पैरो दे लेकर हाथो तक कमजोरी हो सकती है, यह तक की सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है | अच्छी बात यह है की सही समय पे इलाज से 80-90% मरीज ठीक हो जाते है | इस बोग में जाने गब्स के लक्षण , कारण, इलाज और बचाव के उपाय |
GBS सबसे आम और खतरनाक तीव्र लकवा वाली नसों की बीमारी है | दुनिया भर में हर साल करीब 1 लाख लोग इससे प्रभावित होते है | GBS के कई प्रकार होते है , जिनके लक्षण और नुकसान अलग – अलग है | यह रोग ज्यादातर किसी संक्रमण या इम्यून सिस्टम की उत्तेजना के बाद होता है | इससे शरीर की रक्षा प्रणाली गलती से अपनी नसों पर हमला कर देती है | खासकर Campylobacter jejuni बैक्टीरिया के संक्रमण में बैक्टीरिया और नसों के बीच समानता की मुख्या वजह बनती है | संक्रमण के 1-2 हफ्तों बाद हाथ – पैरो में तेजी से कमजोरी, झनझनाहट शुरू होती है , जो सुन्नता और चेहरे की नसों को भी प्रभावित कर सकती है | यह 2-4 हफ्तों में सबसे ज्यादा बिगड़ जाती है | इसमें 20-30% मरीजों में सास लेने की तकलीफ भी हो सकती है | व्यसक रोगियों में लगभग 2/3 लोगो में कमजोरी या पैरालिसिस के पहले श्नसन तंत्र ( जैसे सर्दी – झुकाम ) या पेट के संक्रमण ( जैसे डायरिया ) के लक्षण मिलते है | इसमें 30% मरीजों को अस्पताल के भर्ती के दौरान शवासन विफलता शुरू हो जाती है, जिसके लिए वेंटीलेटर अवं गहन चिकित्सक (ICU) की जरुरत पड़ती है | तेजी से बढ़ती कमजोरी वाले मरीजों में IVIG अवं प्लाज्मा एक्सचेंज को जल्द शुरू करना बचाव का सबसे अच्छा तरीका है
GBS के कारण
Campylobacter jejuni GBS का सबसे प्रमुख कारण है, जो 25-50% मरीजों में संक्रमण का कारण है | एशियाई देशो में इसकी आवृति और भी ज्यादा होती है | GBS से जुड़े अन्य संक्रमण :-
- Cyomegalo virus (CMV)
- Influenza A
- Ebstein Barr Virus (EBV)
- Mycoplasma Pneumonia
- Haemophilus influenza
- Hepatitis E ka GBS से सम्बन्ध नेदरलैंड और बांग्लादेश के मरीजों में पाया जाता है |
- वैक्सीन सम्बंधित मामले भी सामने आये है जैसे – सेम्पले रेबीज वैक्सीन और विभिन्न इन्फ्लुएंजा A वैक्सीन
GBS के लक्षण
GBS के मरीजों में पैरो से शुरू होकर तेजी से फैलने वाली कमजोरी मुख्य लक्षण है | जयादातर लोग पहले पैरो के तलुओं या उंगलियों में झनझनाहट महसूस करते है , फिर चलना मुश्किल हो जाता है |
शुरुवाती लक्षण :-
- कमजोरी का पैटर्न : पैरो से शुरू होकर हाथो और चेहरे तक फैलती है | कभी – कभी सीधे ऊपरी हिस्से से भी शुरू हो सकती है |

- हाथ पैरो में झनझनाहट , चलते – चलते लड़खनाना, चेहरा लटकना या निगलने में तकलीफ |
- दर्द : पीठ या मासपेशियो में दर्द कई बार कमजोरी से पहले शुरू हो जाता है |
- रिफ्लेक्स : घुटने हिलने वाले रिफ्लेक्स गायब हो जाना |
रोग कैसे बढ़ता है :
- समय : ज्यादातर मरीज 2 हफ्ते में सबसे बुरी हालत में पहुंचते है |
- गंभीर खतरा : 20-30% मरीजों में सास लेने में दिक्कत होती है , ICU में वेंटीलेटर की जरुरत भी पढ़ सकती है |
- उपचार के बाद : IVIG या प्लाज्मा एक्सचेज के दौरान 25% मरीजों में अस्थायी बिगढ़न हो सकती है | यह इलाज का फ़ैल होना नहीं है |
इनमें से कोई भी लक्षण अगर आपको है तो तुरंत डॉक्टर को संपर्क करे – जल्दी इलाज से रिकवरी संभव है |
GBS का इलाज
इसका कोई पूरा इलाज नहीं है , लेकिन दो आसान उपचार से जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है |
- प्लाज्मा एक्सचेंज : इस प्रक्रिया में खून का प्लाज्मा निकलते है , जिसमे नुकसान पहुंचने वाली एंटीबाडीज होती है | फिर अच्छा प्लाज्मा खून की कोशिकाओ में वापस दाल देते है , जिससे शरीर में अच्छा प्लाज्मा बनने लगता है |
- IVIG इंजेक्शन : इसमें दुसरो के अच्छे एंटीबाडीज नस में डालते है | ये बुरे एंटीबाडीज को रोक देते है |
IVIG को प्लाज्मा एक्सचेंज की तुलना में जायदा प्रधमिकता दी जाती है क्योकि वह आसानी से दिया जा सकता है, कम जटिलताएं होती है , अस्पताल में कम प्रवास की आवश्यकता पड़ती है , और कम लगत में भी काम हो जाता है |
अन्य जरुरु बाते जो याद रखनी है
- इन मरीजों में दर्द बहुत होता है इसलिए दर्द की दवाई देना आवश्यक है |
- लम्बे समय तक लेते रहने की वजह से खून का थक्का बनने की आशंका रहती है | तो खून पतला करने की दवाई चलती है |
- फिजियोथेरेपी इन मरीज के लिए बहुत आवश्यक है, हाथ – पैर चलते रहने से वह जकड़ते नहीं है | ठीक होने के बाद भी फिजियोथेरेपी करे| व्हीलचेयर, लेग ब्रेस आदि के सहारे चलना सीखे | 80-90% लोग पूरी तरह ठीक हो जाते है | रिकवरी सामान्यतः 6- 12 महीनो में होती है | परन्तु कई मरीजों को 3 साल तक का वक़्त भी लग जाता है |
- 80% लोग 6 महीनो में खुद चलने लगते है
- 60% लोग 1 साल बाद पूरी ताकत हासिल कर लेते है |
- 5-10% लोगो में रिकवरी बहुत धीमी और अधूरी होती है |
- बच्चो में GBS बहुत कम होता है , लेकिन होने पर व्यसको से जयादा जल्दी ठीक हो जाता है |
GBS रोकथाम के उपाय
Campylobacter संक्रमण का प्रमुख कारण है , इसलिए संक्रमण से बचने के लिए इन बातो का ध्यान रखे :
- खाने को अच्छे से पकाये विशेषकर चिकेन , मटन , अंडा क्योकि Campylobacter कच्चे मीट से फैलता है |
- पर- संदूषण रोके – कच्चे चिकेन के लिए अलग चाकू अवं बर्तन रखे | कभी भी पका खाना कच्चे मांस वाली थाली में न रखे |
- हाथ की सफाई रखे अवं कच्चा मांस चुने के बाद हाथ धो ले |
- कच्चा दूध न पिए – बिना पस्टेयरीज़ेड मिल्क अवं उसके उत्पादों से सावधान रहे ; इनमे खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते है |
- साबुन अवं पानी से बार बार हाथ धोये खासकर : खाने से पहले, शौचालय के बाद, सार्वजनिक जगहों से आने के बाद | अगर साबुन- पानी न हो तो अल्कोहल बेस्ड सांइटिज़ेर का भी प्रयोग कर सकते है|
- हाल ही में पाया गया है की ज़ीका वायरस के संक्रमण से भी GBS हो सकता है | ऐसे में अगर आप ज़ीका वायरस प्रभावित क्षेत्र में रहते है या यात्रा कर रहे है तो मचारो से सावधान रहे |