रूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) एक ऐसा रोग जो विकासशील देशो में युवाओ के बीच हृदये सम्बन्धी बीमारियों और मौतों का कारण बन गया है | मीडिया अवं निति निर्माताओं द्वारा इसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है | जबकि यह दुनिया भर में हर साल लगभग 2.5 लाख मौतों का कारण बनता है | एक्यूट रूमेटिक फीवर (RF) – RHD का प्रारम्भिक रूप है | यह विभिन्न अंगो को प्रभावित कर सकता है और हृदये वाल्व में अपर्वतीय क्षति अवं हार्ट फेलियर (heart failure) का कारण बन सकता है | इस ब्लॉग में हम जानेगे RF और RHD के कारण , लक्षण , उपचार अवं रोकथाम के बारे में |
यह बीमारी गरीबी से जुडी है | गले में स्ट्रेप (streptococcus) के संक्रमण ( जैसे tonsilitis) का सही इलाज न होने पर शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) गलती से अपने ही हृदये के वाल्व पर हमला कर देता है, जिससे स्थायी नुकसान होता है | RHD का वैश्विक बोझ अभी भी भरी है , खासकर काम आय वाले देशो में | 2021 तक दुनिया भर में 40.5 मिलियन से जयादा लोग इससे प्रभावित थे , और हर साल 3 लाख मौते होती है | 1990 से 2021 तक इसका फैलाव 32.3 मिलियन से बढ़कर 54.8 मिलियन हो गया है | भारत में अनुमानित 1.5 मिलियन मरीज है जिनमे से 72% महिलाये प्रभावित है | ग्रमीढ क्षेत्रों के युवाओ में इसे ज्यादा देखा गया है | इसका मृत्यु दर 4.7% प्रति वर्ष है |
RHD 20-50 वर्ष की आयु के व्यासको में पाया जाता है | यह उम्र आर्थिक रूप से सक्रिय लोगो की होती है , इसलिए बीमारी का बोझ परिवार और समाझ पर भरी पढता है | बचपन में RF के संक्रमण के 10-20 साल बाद लक्षण उभरते है | वही गर्भवती महिलाओ में RHD प्रमुख रोग है | दक्षिण एशिया में गर्भवती महिलाओ में हृदय रोग की समेकित प्रचलन 1.46% है , जिसमे RHD प्रमुख है | जबकि सिर्फ भारत में गर्भवती महिलाओ में हृदय रोग 1-3% देखा गया है जिनमे RHD मुख्या है | इन महिलाओ को हृदय अतालता (Arrhythmia) अवं हृदय विफलता (heart failure) सहित प्रतिकूल परिणामो का खतरा होता है , क्योकि रक्त की मात्रा भड़ने से ह्रदय के वाल्वो पर प्रभाव पढता है | कई बार महिलाओ को गर्भावस्ता से पहले RHD के बारे में पता ही नई होता है |
हलाकि दुनिया के कई हिस्सों में इसका उन्मूलन हो चूका है, फिर भी यह बीमारी उपसहारा अफ्रीका ,madhya पूर्व , मध्य और दक्षिण एशिया , दक्षिण प्रशांत क्षेत्र और उच्च आय वाले देशो में प्रवाशियो और वृद्ध वयस्कों (visha रूप से स्वदेशी ) में देखी गयी है |
RF/ RHD के लक्षण
RF के लक्षण
- बुखार
- जोड़ो में दर्द ( घुटना, टखना, कोहनी, कलाई)
- थकान
- कोरिया नमक झटकेदार अनियंत्रित शारीरिक हरकते
- जोड़ो के पास त्वचा के नीचे दर्द रहित गांठे
- एक स्पष्ट केंद्र के साथ गुलाबी छल्ले से बने दाने
- दिल की असामान्य ध्वनि
RHD के लक्षण
- सीने में दर्द या बेचैनी
- सांस लेने में तकलीफ
- पेट , हाथो , पैर में सूजन
- थकान
- तेज या अनियमित दिल की धड़कन
RF/RHD का उपचार
RHD का कोई स्थायी उपचार नई है | यह दिल के वाल्व को हमेशा के लिए ख़राब कर देता है | दवाइया संक्रमण रोक सकती है, लेकिन ख़राब वाल्व को ठीक नई कर सकती | बीमारी की गंभीरता अवं जटिलता के आधार पर दवाइया दी जाती है | खून पतला करने की दवाई भी चलती है ताकि खून का थक्का न बने | गंभीर मामले में वाल्व को रिपेयर या रेप्लस करने की आवश्यकता भी पड़ सकती है |
RHD/RF की रोकथाम
RF/RHD को रोका जा सकता है | हलाकि दोनों RF/RHD गैर – संक्रमण रोग है, परन्तु इनकी वजह संक्रमण ( बैक्टीरियल गले का इन्फेक्शन ) होता है | इसलिए इसको रोकना आवश्यक है | RHD को रोकने से पहले हमे रफ को रोकना आवश्यक है, जो RHD का पूर्ववर्ती है |
रोकथाम की रणनीतियाँ
प्रारंभिक रोकथाम – यह रोकथाम के सामान्य जोखिम कारको को सन्दर्भित करता है , जैसे सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय | इससे हम लोगो में स्ट्रेप (group A streptococcus ) इन्फेक्शन को कम कर सकते है | प्रारंभिक रोकथाम के उपाय :-
- RF/RHD के बारे में जागरूकता फैलाना
- स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाना
- कम भीड़भाड़ वाले बेहतर आवास की स्थिति
- स्वछता बनाये रखना जैसे – हाथ धोना , खासते समय मुँह ढकना , कचरा सही जगह फेकना
- परिवारों को स्वछता और सफाई का महत्व समझाना |
प्राथमिक रोकथाम:
- गले दर्द का जल्दी इलाज
- स्वास्थ्य कर्मचारियों को वायरल अवं बैक्टीरियल गले के इन्फेक्शन में फर्क कारण आना चाइये | अगर सुविधा हो तो गले के इन्फेक्शन की जांच (Swab culture) जरूर करवाए |
- बैक्टीरियल गले के इन्फेक्शन के लिए तुरंत एंटीबायोटिक्स से इलाज शुरू करवाए | तथा मरीज को पूरा एंटीबायोटिक कोउर्से करने के लिए प्रेरित करें|
द्वितीयक रोकथाम : इसका मतलब है जिन लोगो में RF हो चूका है उनमें RHD होने से रोकना | यह इसलिए जरुरी है ताकि बीमारी (RF) दुबारा न हो और RHD और आगे न बढे और नियंत्रण में रहे | लम्बे समय तक पेनिसिलिन (PENICILLIN ) के इंजेक्शन इसका सबसे असरदार इलाज है|
बेंज़ाथिन पेनिसिलिन इंजेक्शन : व्यासको को हर 3 हफ्ते में , बच्चो को हर 2 हफ्ते में |
तृतीयक रोकथाम : यह उन मरीजों के लिए है जो RHD से ग्रसित है | इसका लक्ष्य लक्षणों को कम करना , जटिलताओं को रोकना और समय से पहले मौत से बचाना है | इसमें निम्नलिखित बाते आती है :
- दिल की कमजोरी अवं अनियमित धड़कन के लिए दवाई
- हृदय वाल्व सर्जरी
- सर्जरी के बाद प्रबंधन
- खून पतला करने की दवाई
- PT/INR की नियमित जांच
भारत में RHD/ RF की रोकधाम अवं जागरूकता के लिए दो स्वास्थय कार्यक्रम है :
- राष्ट्रीय कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक रोकधाम अवं नियंत्रण कार्यक्रम (NPCDCS)
- राष्ट्रीय बाल स्वास्थय कार्यक्रम (RBSK)