हाथ धोना क्या होता है ?
स्वछता का अर्थ उन व्यवहारों और आदतों से है जो स्वस्थ्य को बनाये रखने और बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद करते है | हाथ धोना (Handwashing / Hand hygiene ) वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत हाथो की उचित और नियमित सफाई की जाती है, ताकि हाथो पर मोजूद रोगाड़ु हटाए या निष्क्रिय किये जा सके और संक्रमण व बीमारियों के प्रसार को रोका जा सके | इसमें साबुन और पानी से हाथ धोना या अल्कोहल बेस्ड हैंड रब का उपयोग करना शामिल है |
हाथ धोना क्यों आवश्यक है ?
स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मने जाने वाली अच्छी आदतों में साबुन से हाथ धोना हर जगह पहली प्रधमिकता है | हाथ साफ़ करने जैसे सरल आदत जीवन बचा सकती है और रोग को फैलने से रोक सकती है | अनुमान है की हर साल लगभग १४ लाख लोग , जिनमे पांच वर्ष से काम की आयु के लगभग ४ लाख बच्चे शामिल है , अपर्याप्तः WASH (जल , स्वछता , हाथ धोना ) के कारण होने वाली , रोकी जा सकने वाली बीमारियों से मृत्यु का शिकार होते है |
इन बीमारियों में दस्त , सास की बीमारी , मिटटी से फैलने वाले कृमि संक्रमण (soil transmitted helminths ) और कुपोषण (malnutrition ) शामिल है | इनमें से अकेले दस्त से होने वाली लगभग ३ , ९४ , ००० मौतौ , सास संक्रमण से होने वाली लगभग ३ , ५६ , ००० मौतौ के लिए जिम्मेदार है | हाथ धोने से दस्त के मामलो में ३० % और सास संक्रमण के मामलो में १७ % तक गिरावट देखने को मिली है ,जिससे जनस्वास्थ्य में बड़े और मापनीय सुधार संभव होते है |
स्पष्ट लाभों के बाबजूत भी , वर्ष २०२४ में भी ।१७ अरब लोगो के घर में बुनियादी हाथ स्वछता सेवाएं उपलब्ध नहीं थी, जिनमे से ६१ करोड़ लोगो के पास तो कोई सुविधा ही नहीं थी |
हाथ कब धोएँ?
- खाना बनाने से पहले और बाद में
- खाना खाने और किसी को परोसने से पहले
- शौचालय उपयोग करने के बाद या मल से संपर्क में आने के बाद
- खस्ने , छीकने, नाक साफ़ करने के बाद
- जब हाथ स्पष्ट रूप से गंदे हो
- बहार से घर आने पर
- बीमार व्यक्ति की देखभाल करने के बाद
हाथ स्वच्छता की सुविधाएँ और आवश्यक संसाधन
- पानी – हाथ धोने के लिए साधारण साबुन और पानी का इस्तेमाल पर्याप्त समय तक करना चाहिए , ताकि दोनों हाथ पूरी तरह धक् जाये और अच्छी तरह रगड़े जाये | किसी व्यक्ति के पास कितना पानी है इससे यह तय होता है की वह कितनी बार और कितनी अच्छी तरह हाथ धो पाता है | हाथ धोने में कितना पानी लगेगा यह इस बात पर भी निर्भर करता है की हाथ धोने की व्यवस्था कैसी है | जैसे बहते नल का पानी आमतौर पर एक टब या बाल्टी की तुलना में जयादा पानी खर्च करता है | पानी की कमी के कारण लोग हाथ ठीक से नहीं धो पाते | इसलिए शोध बताते है की हाथ धोना अवं उससे जुड़े कार्यक्रम तभी लाभकारी जब पानी पर्याप्त और नियमित रूप से उपलब्ध है |
- साबुन – एक अध्यन में उपाय गया की तीन देश – थाईलैंड , केन्या , एथोपिए में साबुन सबसे ज्यादा कपड़े धोने में इस्तेमाल होता है इसके बाद स्नान , बर्तन और सबसे आखिर में हाथ धोने के लिए इस्तेमाल होते है |सादा साबुन से हाथ धोने से सूक्ष्मजीव पानी के साथ निकल जाते है | साधारण साबुन जैसे बार सोप , पत्ते , टिश्यू या लिक्विड साबुन में डिटर्जेंट और सर्फेक्टेंट के गुण होते है | ये पदार्थ गन्दगी एवं अस्थायी जीवो को अपने साथ पकड़ कर पानी में निलंबित करते है | इस प्रक्रिया में कीटाणु को शरीर से हटाया जाता है , न की मारा जाता है |
- हाथ धोने का स्थान – साहित्य से प्राप्त प्रमाण बताते है की यदि किसी भी स्थान पर हाथ धोने की निर्धारित सुविधा उपलबध हो तो इससे हाथ स्वछता का पालन करने में मदद मिलती है | अधिकांश अध्यनो में यह पाया गया की जहाँ हाथ धोने की सुविधा हो , वहाँ लोग हाथ धोने की आदत को अधिक अपनाते है |
हाथ धोने का सही तरीका ?
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जब पानी और साबुन उपलब्ध न हो तब ?
CDC ( Centres for Diseases Control & Prevention ) के अनुसार साबुन और पानी से हाथ धोना संक्रमण से बचने का सबसे सस्ता , सरल और प्रभावी तरीका है | नियमित रूप से हाथ धोने से कई प्रकार के कीटाणुऔ और बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है | यदि साबुन और पानी उपलब्ध न हो तो 60 % अल्कोहल बेस्ड हैंड सांइटिज़ेर से हाथ साफ़ कर सकते है | हालाकि , हाथो पर दिखने वाली गन्दगी अवं चिकनाई को सांइटिज़ेर साफ़ नहीं कर पाता |
15 अक्टूबर 2008 को पहली बार ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे मनाया गया | इस दिन दुनिया के 70 से अधिक देशो में लगभग 12 करोड़ बच्चो ने साबुन से हाथ धोकर इस दिवस को मनाया | तब से हर साल 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे मनाया जाता है | हाथो की स्वछता को बढ़ावा देने के लिए 2009 में विश्व स्वस्थ्य संगठन (WHO) ने 5 मई को विश्व हाथ स्वछता दिवस ( World Hand Hygiene Day ) घोषित कर दिया |