PCOS जिसे हम Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome भी कहते है | यह एक हार्मोनल इम्बैलेंस से होने वाली बीमारी है | हर आठ में से एक महिला को यह होता है | यह प्रजनन आयु वर्ग की 17 करोड़ महिलाओ को प्रभावित करता है | इसलिए यह ज्यादातर 15-49 वर्ष की महिलाओ में देखा जाता है | 70% से अधिक महिलाओ को तो पता भी नहीं होता की वह इस रोग से ग्रस्त है |
PCOS के लक्षण
PCOS हमारे शरीर के किसी एक अंग को प्रभावित नहीं करता बल्कि इसमें शरीर के कई अंग प्रणालियों पर स्वस्थ्य सम्बन्धी प्रभाव पढता है | इसके कारण शरीर में कई बदलाव अवं लक्षण देखने को मिलते | जैसे –
1.मेटाबोलिक गड़बड़ी के मुख्य लक्षण
मोटापा , कोलेस्ट्रॉल बढ़ना , डायबिटीज , ब्लड प्रेशर , हृदय रोग , नींद से जुडी बीमारिया
2. प्रजनन सम्बन्धी विकार
माहवारी समय से न आना , अनियमित या बहुत अधिक मासिक धर्म होना , बांझपन , गर्भावस्था से जुडी जटिलताएं |
3.मानसिक विकार
डिप्रेशन , एंग्जायटी , स्लीप डिसऑर्डर
4. त्वचा सम्बन्धी विकार
गंजापन , मुहासे, अत्यधिक बाल उगना |
आजकल की इस व्यस्त जीवनशैली के कारण 10-13% महिलाएं इस रोग से ग्रस्त है | PCOS से पीड़ित 38-88% महिलाए या तो अधिक वजन वाली होती है या मोटापे का शिकार होती है | इन मरीजों में शुगर अवं ब्लड प्रेशर की समस्या होना भी आम है | हलाकि इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है , लेकिन सही लाइफस्टाइल बदलाव और दवाओं की मदद से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है |
आज हम अपने ब्लॉग में PCOS में क्या जीवनशैली अपनानी चाहिए इसका विवरण करेंगे | PCOS के इलाज की शुरुवात हमेशा लाइफस्टाइल में सुधार से होता है | यदि आपका वजन अधिक है , तो सिर्फ 5-10% वजन कम करने से आपके पीरियड्स नियमित हो सकते है और ओवुलेशन में सुधार हो सकता है |
खान पान की आदते, जीवन शैली में बदलाव और वजन कम करना PCOS के लक्षण को कम करने में बहुत बढ़ी भूमिका निभाते है |
1. संतुलित आहार
सबसे पहले संतुलित आहार की बात करेंगे | यह काफी जरुरी है आपके वजन को कम करने में | साथ में हमे ऐसा आहार लेना है जो हमारी बॉडी में इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करे | मेडिटरेनीयन डाइट और keto डाइट दोनों ही बेहद असरदार है | यह दोनों डाइट इन समस्याओ पर जड़ से काम करती है | लेकिन दोनों का तरीका एकदम अलग है |
मेडिटरेनीयन डाइट
यह डाइट दुनिया की दुनिया की सबसे हेअल्थी और पॉप्युलर डाइट प्लान है | यह भूमध्य सागर के आस-पास के देशो ( जैसे इटली , ग्रीस , स्पेन ) के लोगो के पारम्परिक खान – पान पर आधारित एक स्वस्थ्य जीवनशैली है |
यह डाइट अंदरूनी सूजन को कम करने में , दिल की सेहत , ब्लड शुगर , PCOS को मैनेज करने के लिए डॉक्टर की पहेली पसंद है | यह एक प्लांट बेस्ड डाइट ( संयंत्र आधारित आहार ) है या कह सकते है की शाखाहारी आहार को जयादा महत्त्व दिया जाता है |
इस डाइट में आता है —-
- हरी पत्तेदार सब्जिया , ब्रोक्कोली , आलू , गाजर, कद्दू आदि |

- सभी प्रकार के फल
- साबुत अनाज – ब्राउन राइस , क्विनोआ , बाजरा, मक्का, गेहू
- दाल और फलिया – छोले , राजमा, दाल , सोयाबीन , मूंगफली
- नट्स और सीड्स – बादाम , अखरोट , मखाना, अलसी , अंजीर , सूर्यमुखी|
इस डाइट में रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट का सेवन करना वर्जित है | इसके आलावा रिफाइंड शुगर , केक्स , पेस्ट्री , स्वीट्स, पास्ता आदि सब मना है |
मेडिटेरनान डाइट में ओलिव आयल ( जैतून का तेल ) वासा का मुख्य स्त्रोत है |
मेडिटेरनां डाइट शरीर में सूजन कम करता है | बेड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है | रखतचाप को कम करता है | भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट आपकी कोशिकाओं की रक्षा करते है और पुरानी बीमारियों के खतरों को कम करते है |
कीटो डाइट
एक ऐसी आहार योजना जिसमे वसा अधिक और प्रोटीन की मात्रा मध्यम और कार्बोहायड्रेट की मात्रा बहुत कम है | इसका मुख्य उद्देश्य आपके शरीर के मेटाबोलिज्म को कार्बोहायड्रेट की जगह प्रोटीन और फैट पर निर्भर करना है | इसकी दैनिक कैलोरी का विभाजन आमतौर पर इस प्रकार है :-
वसा – 70-80% ; प्रोटीन – 10-20% ; कार्बोहायड्रेट – 5-10%
इसमें शामिल करने वाले खाद्य पदार्थ कुछ इस प्रकार है —
- तेल – जैतून का तेल , नारियल तेल , माखन

- प्रोटीन – मॉस , चिकन , फिश , अंडे
- कम कार्बोहायड्रेट वाली सब्जिया – ब्रोक्कोली , हरी पत्तेदार सब्जिया , पालक , मेथी , फूलगोभी , तोरई
- डेरी उत्पाद – पनीर , हैवी क्रीम , दही
- नट्स – बादाम , अखरोट आदि
मोटापे और PCOS से पीड़ित महिलाओं में कम कार्बोहायड्रेट वाले कीटो डाइट से वजन , टेस्टोस्टेरोन , LH/FSH अनुपात और फास्टिंग सीरम इन्सुलिन में महत्वपूर्ण कमी देखि गयी है |
2. व्यायाम
बिना दवा के PCOS को मैनेज करने का सबसे शक्तिशाली तरीका है व्यायाम | यह सिर्फ कैलोरी बर्न करने या वजन घटाने के बारे में नहीं है , यह शरीर के मुख्य हार्मोनल असंतुलन – विशेष रूप से इन्सुलिन रेजिस्टेंस को ठीक करने के बारे में है |
PCOS में महिलाओ को कोशिकाओं अक्सर इन्सुलिन का विरोध करती है , जिससे ब्लड शुगर अवं मोटापा दोनों बढ़ता है | व्यायाम एक चाबी की तरह काम करता है , इससे शरीर की मश्पेशिया ग्लूकोस के मेटाबोलिज्म को बढ़ा देती है , तथा इन्सुलिन की सेंसिटिविटी को भी बढ़ा देता है | इन्सुलिन सेंसिटिविटी बढ़ने से ब्लड में फ्री इन्सुलिन की मात्रा कम हो जाती है |
बढ़ा हुआ इन्सुलिन लेवल अंडाशय को अधिक टेस्टेस्टेरोन बनाने के लिए उकसाता है ( जिससे मुहासे , गंजापन , चेहरे पर बाल आने की समस्या होती है | इन्सुलिन को कम करके इस समस्या का हल हो सकता है | नियमित और मध्यम व्यायाम सूजन करने में मददगार है |
PCOS के लिए सबसे बेहतरीन व्यायाम —
- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग – वजन उठाना ( वेट लिफ्टिंग ), बॉडीवेइट एक्ससरसीसे ( जैसे पुशअप्स , स्क्वाट्स ) या रेजिस्टेंस बैंड का उपयोग करना |
- कार्डिओ – तेज चलना ( ब्रिस्क वाक ), साइकिल चलाना, तैरना , डांस करना
- माइंड- बॉडी एक्ससरसीसे – योगा | यह तनाव को कम करता है , लचीलापन सुधरता है और ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है |
हलाकि व्यायाम करना बहुत अच्छी बात है , लेकिन बिना आराम के रोजाना घंटो करने वाला व्यायाम उल्टा असर दिखा सकता है | इसलिए निरंतरता पे ज्यादा ध्यान दे, तीव्रता पे नहीं | यदि आपका वर्कआउट आपको ऊर्जावान महसूस करता है तो यह बहुत अच्छी बात है | परन्तु अगर आप वर्कआउट के बाद पूरी तरह पस्त है , दर्द में है , थका हुआ महसूस करती है तो वर्कआउट की तीव्रता को कम करे |
सुचना श्रोत्र